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HINDI SONNETS

Sunday, 20 May 2012

क्यूँ हर चीज़ कम पड़ जाती है


जितनी भी बातें करूँ मैं तुझसे;
सब कम पड़ जाती है;
याद करने को तुझे;
रातें कम पड़ जाती है;
सोचूं जो तुझसे दूर होने की;
मेरी साँसे थम जाती है;
हो जब भी साथ तेरा;
धड़कने बड़ जाती है;
हो जब मेरे हाथों में तेरा हाथ;
क्यूँ तेरी नज़रे झुक जाती है;
तेरे साथ रहने को;
क्यूँ ये दुनिया छोटी पड़ जाती है.
                                      _____________अजय निगम"अज्जू "