जितनी भी बातें
करूँ मैं तुझसे;
सब कम पड़
जाती है;
याद करने को
तुझे;
रातें कम पड़
जाती है;
सोचूं जो तुझसे
दूर होने की;
मेरी साँसे थम जाती
है;
हो जब भी
साथ तेरा;
धड़कने बड़ जाती
है;
हो जब मेरे
हाथों में तेरा
हाथ;
क्यूँ तेरी नज़रे
झुक जाती है;
तेरे साथ रहने
को;
क्यूँ ये दुनिया
छोटी पड़ जाती
है.
_____________अजय निगम"अज्जू "