बड़े बड़े नेता ही जब कर रहे घोटाला;
छोटे नेता क्यों रहे पीछे;
सो उनने भी घोटाला कर डाला;
कभी 2G , कभी कोयले को ही पैसा बना डाला;
आम इंसान की जेब तो छोड़ो;
देश के चोरों ने तो-
बच्चों की पढाई को भी निशाना बना डाला;
दाम बड़ा के बैठें है कोने में;
अब ना जाने किसे बदलेंगे सोने में;
अरबों तो छुपा रखे है विदेशों में;
ये तो देश ही बेच रहे विदेशों में;
नेतओं के लिवास में दुकानदार हैं ये;
थोडा थोडा कर के देश बेचने को तैयार हैं ये;
वाह! क्या किस्मत है हिंदुस्तान की;
बोली लग रही है उसकी शान की;
देशभक्तों पर ही लगा रहे;
देशद्रोह का इल्ज़ाम है;
ये सब जानने के बाद भी
क्यों सब अंजान हैं;
आवाम के हाथ में ही तो;
हिंदुस्तान की जान है;
घोटालेबाजों को अब ना टिकने दो;
"घोटाला भवन" को भी आज
घोटालेबाजों के साथ बिकने दो;
----------------------------- अजय निगम