सड़क किनारे सोने वाला;
केवल जानवर ही नहीं हो सकता;
कूडे से बीन के खाने वाला;
केवल जानवर ही नहीं हो सकता;
क्या कहूँ उस शख्स को;
लेकिन शायद वो इंसान भी नहीं हो सकता;
अमीर लोगों की भाषा में;
उसे इंसान नहीं "गरीब" कहते है;
अरे! कोई पूछो जा कर उन से;
की वो किस तरह रहते है;
जब दो वक़्त की रोटी को उनका बच्चा तरसता है;
मांगने आते है रोटी,लेकिन हर कोई उन पर बरसता है;
अरे! कुत्ते को भी दो वक़्त की रोटी मिल जाती है;
उसे तो आराम से जीने को एक जिंदगी मिल जाती है;
बिन वस्त्र घुमने वाला;
केवल जानवर ही नहीं हो सकता;
सर्दियों में सीमट के सोने वाला;
केवल जानवर ही नहीं हो सकता;
और तो और सच बोलने वाला इंसान नहीं हो सकता;
क्या कहूँ उस शख्स को;
लेकिन पेट पालने के लिए सच्चा तो "गरीब" भी नहीं
हो सकता;
----------------------------अज्जू निगम