कभी तो ठन्डे जूस का गिलास है जिन्दगी...
कभी खोलती चाय सी है जिन्दगी......
कभी मक्खन सी चलती....
तो कभी पापड़ सी टूटती है जिन्दगी....
हर पल बदलता स्वाद है जिन्दगी....
कभी केरी की तरह खट्टी...
तो कभी गन्ने सी मीठी है जिन्दगी....
कभी आलू की तरह मामूली....
तो कभी पनीर की तरह खास है जिन्दगी.....
कभी तरबूज की तरह रसीली....
तो कभी अमरुद की तरह रुखी है जिन्दगी....
जिन्दगी मैं उतार चढ़ाव तो कई है.....
लेकिन खुश रहने का नाम है जिन्दगी.......
---------अजय निगम