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HINDI SONNETS

Saturday, 19 May 2012

चाहत


चाहो तो -पहाड़ो से ऊँचे हो तुम;
न चाहो तो एक पत्थर भी नहीं;

चाहो तो- कीचड़ मे खिला कमल हो तुम;
न चाहो तो कीचड़ की गंध भी नहीं;

चाहो तो-लाखों में एक हो तुम;
न चाहो तो अस्तित्व भी नहीं;

चाहो तो -एक शोला हो तुम;
न चाहो तो चिंगारी भी नहीं;

चाहो तो-क्या कुछ नहीं हो तुम;
न चाहो तो कुछ भी नहीं;

चाहने की चाह तो रखो दिल में;
फिर देखो;
क्या कुछ नहीं हो तुम;
     
                           ---------अजय निगम

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