चाहो तो -पहाड़ो
से ऊँचे हो तुम;
न चाहो तो एक
पत्थर भी नहीं;
चाहो तो- कीचड़ मे
खिला कमल हो तुम;
न चाहो तो कीचड़
की गंध भी नहीं;
चाहो तो-लाखों
में एक हो तुम;
न चाहो तो
अस्तित्व भी नहीं;
चाहो तो -एक शोला
हो तुम;
न चाहो तो
चिंगारी भी नहीं;
चाहो तो-क्या कुछ
नहीं हो तुम;
न चाहो तो कुछ भी
नहीं;
चाहने की चाह तो
रखो दिल में;
फिर देखो;
क्या कुछ नहीं हो
तुम;
---------अजय निगम
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